कमलनाथ का तीसरा सवाल; मां-बहन-बेटियों का जीवन अंधकार से क्यों भर दिया ?
कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने भाजपा सरकार के खिलाफ 40 दिन 40 सवाल अभियान के तहत तीसरा सवाल प्रदेश की बदहाल कानून व्यवस्था को लेकर किया है। उन्होंने पूछा, मामा, मुखौटा लगाकर वोट क्यों लिया? मां-बहन-बेटियों का
जीवन अंधकार से क्यों भर दिया? मध्यप्रदेश को 'अंधेरगर्दी-चौपट राज' में क्यों बदल दिया?
कमलनाथ ने पहले दिन बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं और दूसरे दिन स्वास्थ्य योजनाएं और बीमारियों से हो रही लोगों की मौत को लेकर शिवराज सरकार को घेरा था। तीसरे सवाल में उन्होंने प्रदेश में बढ़ रहे महिला अपराध और उसे रोक पाने में
सरकार की नाकामी को लेकर सवाल किए हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने 9 बिंदुओं का हवाला देकर पूछा है कि मां-बहन और बेटियों का जीवन अंधकार में क्यों धकेल दिया। उन्होंने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के आधार पर प्रदेश में कानून व्यवस्था की भयावह तस्वीर पेश की
है।
सवाल नंबर तीन
मामा, मुखौटा लगाकर वोट क्यों लिया ?
माँ-बहन-बेटियों का जीवन अंधकार से क्यों भर दिया ?
मध्यप्रदेश को 'अंधेरगर्दी-चौपट राज ' में क्यों बदल दिया ?
मामा राज के 13 वर्षों में 2,41,535 महिलाएं अपराधियों का शिकार हुईं। मामा के सत्ता में आने के बाद 2004 से 2016 में महिला अपराधों में 74.99% वृद्धि हुई।
महिलाओं के अपहरण की घटनाओं में 755% की वृद्धि हुई। 2004 में 584 अपहरण होते थे,वे बढ़कर 2016 में 4994 प्रति वर्ष होने लगे 25,566 महिलाएं अपहरण का शिकार हुई है।
मामा राज में नाबालिग बच्चियों के साथ बलात्कार 249 % बढ़ गए। 2004 में - 710 बलात्कार से 2016 में 2479 बलात्कार प्रतिवर्ष। 17986 नाबालिग बच्चियाँ बलात्कार की शिकार। मामा राज ( 2004- 2016) में 46317 बलात्कार।
मामा राज के 13 वर्षो में अराजक तत्वों, अवसाद और आर्थिक तंगी की वजह से 27 हज़ार 457 महिलाओं ने आत्महत्या कर ली ।
मामा राज में 93 हज़ार 479 महिलाएं छेड़छाड़ का शिकार हुईं। मामा के राज में बहनों के साथ अन्याय में वृद्धि हुई-1168%।
वर्ष 2004 में महिलाओं के प्रति हुए अपराधों के अदालत में लंबित मामले - 6 हज़ार 733 । 2016में महिलाओं के प्रति हुए अपराधों के अदालत में लंबित मामले-85,383।
2016 में 14007 महिला अपराधों में अदालतों में परीक्षण पूरा हुआ और मामा सरकार की कमज़ोर दलीलों की वजह से 10,119अपराधी छोड़ दिये गए।सज़ा दर मात्र 27.8
मामा सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग ने 2004-05 से 16-17 तक 27,590 करोड़ का बजट आवंटित किया मगर इसमें से मामा ने बहनों-भांजियों के संवैधानिक हक़ के 5402करोड़ खर्च ही नहीं किये
मामा के राज में मप्र में 32%नाबालिग बच्चियों की शादी होती है जिनका भविष्य अंधकारमय हो जाता है।
जीवन अंधकार से क्यों भर दिया? मध्यप्रदेश को 'अंधेरगर्दी-चौपट राज' में क्यों बदल दिया?
कमलनाथ ने पहले दिन बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं और दूसरे दिन स्वास्थ्य योजनाएं और बीमारियों से हो रही लोगों की मौत को लेकर शिवराज सरकार को घेरा था। तीसरे सवाल में उन्होंने प्रदेश में बढ़ रहे महिला अपराध और उसे रोक पाने में
सरकार की नाकामी को लेकर सवाल किए हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने 9 बिंदुओं का हवाला देकर पूछा है कि मां-बहन और बेटियों का जीवन अंधकार में क्यों धकेल दिया। उन्होंने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के आधार पर प्रदेश में कानून व्यवस्था की भयावह तस्वीर पेश की
है।
सवाल नंबर तीन
मामा, मुखौटा लगाकर वोट क्यों लिया ?
माँ-बहन-बेटियों का जीवन अंधकार से क्यों भर दिया ?
मध्यप्रदेश को 'अंधेरगर्दी-चौपट राज ' में क्यों बदल दिया ?
मामा राज के 13 वर्षों में 2,41,535 महिलाएं अपराधियों का शिकार हुईं। मामा के सत्ता में आने के बाद 2004 से 2016 में महिला अपराधों में 74.99% वृद्धि हुई।
महिलाओं के अपहरण की घटनाओं में 755% की वृद्धि हुई। 2004 में 584 अपहरण होते थे,वे बढ़कर 2016 में 4994 प्रति वर्ष होने लगे 25,566 महिलाएं अपहरण का शिकार हुई है।
मामा राज में नाबालिग बच्चियों के साथ बलात्कार 249 % बढ़ गए। 2004 में - 710 बलात्कार से 2016 में 2479 बलात्कार प्रतिवर्ष। 17986 नाबालिग बच्चियाँ बलात्कार की शिकार। मामा राज ( 2004- 2016) में 46317 बलात्कार।
मामा राज के 13 वर्षो में अराजक तत्वों, अवसाद और आर्थिक तंगी की वजह से 27 हज़ार 457 महिलाओं ने आत्महत्या कर ली ।
मामा राज में 93 हज़ार 479 महिलाएं छेड़छाड़ का शिकार हुईं। मामा के राज में बहनों के साथ अन्याय में वृद्धि हुई-1168%।
वर्ष 2004 में महिलाओं के प्रति हुए अपराधों के अदालत में लंबित मामले - 6 हज़ार 733 । 2016में महिलाओं के प्रति हुए अपराधों के अदालत में लंबित मामले-85,383।
2016 में 14007 महिला अपराधों में अदालतों में परीक्षण पूरा हुआ और मामा सरकार की कमज़ोर दलीलों की वजह से 10,119अपराधी छोड़ दिये गए।सज़ा दर मात्र 27.8
मामा सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग ने 2004-05 से 16-17 तक 27,590 करोड़ का बजट आवंटित किया मगर इसमें से मामा ने बहनों-भांजियों के संवैधानिक हक़ के 5402करोड़ खर्च ही नहीं किये
मामा के राज में मप्र में 32%नाबालिग बच्चियों की शादी होती है जिनका भविष्य अंधकारमय हो जाता है।
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