दावे सबके, लेकिन किसे मिलेगा राजस्थान में दलितों का वोट
राजस्थान में सत्तारुढ़ बीजेपी और प्रतिपक्ष में कांग्रेस के नेता इन चुनावों में अनुसूचित जाति वर्ग के वोटों की उम्मीद लगाए बैठे हैं. बहुजन समाज पार्टी ने भी राज्य में 197 चुनाव क्षेत्रों में अपने प्रत्याशी खड़े कर समर्थन का दावा किया है.
दलित संगठन कहते हैं कि दो अप्रैल के बंद के बाद ज़मीन पर बहुत कुछ बदला है. दलित कार्यकर्ता सियासी दलों से निराश हैं. मगर कहते हैं कि कोई विकल्प भी तो नहीं है.
इन चुनावों में राजनीतिक पार्टियां एक-एक वोट का हिसाब लगा रही हैं. उनकी नज़र राज्य में 17 फ़ीसद अनुसूचित जाति वर्ग पर भी है.
सत्तारूढ़ बीजेपी को यक़ीन है कि दलित समुदाय बीजेपी को ही वोट देगा. कांग्रेस का भरोसा है कि अनुसूचित वर्ग उनकी पार्टी की हिमायत करेगा.
जयपुर में गिरजेश दलित समुदाय से हैं और दलित महिलाओं के लिए काम करती हैं. गिरजेश ने बीबीसी से कहा कि पिछले चुनावों में इस समुदाय ने बीजेपी पर भरोसा किया और उन्हें लगा यह पार्टी उनका जीवन बेहतर कर सकती है.
वो कहती हैं, ''हमें उम्मीद थी कि दलित महिलाओं के विरुद्ध हिंसा और शोषण की घटनायें थम जाएंगी, हमारे विद्यार्थियों को शिक्षा की सहूलियत और अवसर बढ़ेंगे, किसान खुशहाल होंगे. मगर इन पांच सालों का अनुभव बताता है कि हालात इससे उलट निकले.''
गिरजेश कहती हैं कि दलित समुदाय बहुत निराश हुआ है.
पिछले चुनावों में बीजेपी ने अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित 34 सीटों में से दो को छोड़ कर सभी पर अपनी जीत दर्ज करवाई थी. यह दलित वर्ग में बीजेपी के बढ़ते प्रभाव का सबूत देता था. पर क्या बीजेपी फिर अपना यह प्रदर्शन दोहरा पायेगी?
दलित अधिकार कार्यकर्त्ता भंवर मेघवंशी कहते हैं, ''दलित समुदाय को कांग्रेस से भी बड़ी शिकायतें हैं. मगर अब वे चुनावी अखाड़े में उतरे उस दल और उम्मीदवार को चुनेंगे जो बीजेपी को शिकस्त दे सकता है. कोई भी अपना वोट यूं ही ख़राब करना नहीं चाहेगा. शहरों में बैठे नेता कुछ भी कहते हों, लेकिन धरातल पर दलित यही सोच रखते हैं.
सत्तारुढ़ बीजेपी केंद्र और राज्य सरकार के कामकाज और योजनाओं का हवाला देकर कहती है कि दलित समुदाय पूरी तरह बीजेपी के साथ है.
पार्टी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने बीबीसी से कहा, ''बीजेपी की दोनों सरकारों ने दलित समुदाय के लिए बहुत कुछ किया है. हमने हर योजना में दलित समुदाय का स्थान निश्चित किया है. फिर चाहे उनकी शिक्षा का मामला हो या रोजगार और स्वाथ्य का. हमने बहुत ईमानदारी और शिद्दत से इन वर्गों के लिए काम किया है. स्टार्ट अप योजना में हर बैंक ही नहीं, हर बैंक की शाखा को बहुत साफ़ निर्देश थे कि वे एक महिला, एक एससी और एक एसटी को हर सूरत में ऋण देंगे. इस लिहाज से स्वरोजगार के लाखों अवसर उपलब्ध करवाए गए. हम बिना किसी प्रचार के अपना काम करते हैं.''
वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा का कहना था कि कांग्रेस शुरू से ही वंचित वर्गों के कल्याण और मज़बूती के लिए काम करती रही है. लिहाजा इन वर्गों के लोग कांग्रेस के साथ ही रहेंगे.
दलित संगठन कहते हैं कि दो अप्रैल के बंद के बाद ज़मीन पर बहुत कुछ बदला है. दलित कार्यकर्ता सियासी दलों से निराश हैं. मगर कहते हैं कि कोई विकल्प भी तो नहीं है.
इन चुनावों में राजनीतिक पार्टियां एक-एक वोट का हिसाब लगा रही हैं. उनकी नज़र राज्य में 17 फ़ीसद अनुसूचित जाति वर्ग पर भी है.
सत्तारूढ़ बीजेपी को यक़ीन है कि दलित समुदाय बीजेपी को ही वोट देगा. कांग्रेस का भरोसा है कि अनुसूचित वर्ग उनकी पार्टी की हिमायत करेगा.
जयपुर में गिरजेश दलित समुदाय से हैं और दलित महिलाओं के लिए काम करती हैं. गिरजेश ने बीबीसी से कहा कि पिछले चुनावों में इस समुदाय ने बीजेपी पर भरोसा किया और उन्हें लगा यह पार्टी उनका जीवन बेहतर कर सकती है.
वो कहती हैं, ''हमें उम्मीद थी कि दलित महिलाओं के विरुद्ध हिंसा और शोषण की घटनायें थम जाएंगी, हमारे विद्यार्थियों को शिक्षा की सहूलियत और अवसर बढ़ेंगे, किसान खुशहाल होंगे. मगर इन पांच सालों का अनुभव बताता है कि हालात इससे उलट निकले.''
गिरजेश कहती हैं कि दलित समुदाय बहुत निराश हुआ है.
पिछले चुनावों में बीजेपी ने अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित 34 सीटों में से दो को छोड़ कर सभी पर अपनी जीत दर्ज करवाई थी. यह दलित वर्ग में बीजेपी के बढ़ते प्रभाव का सबूत देता था. पर क्या बीजेपी फिर अपना यह प्रदर्शन दोहरा पायेगी?
दलित अधिकार कार्यकर्त्ता भंवर मेघवंशी कहते हैं, ''दलित समुदाय को कांग्रेस से भी बड़ी शिकायतें हैं. मगर अब वे चुनावी अखाड़े में उतरे उस दल और उम्मीदवार को चुनेंगे जो बीजेपी को शिकस्त दे सकता है. कोई भी अपना वोट यूं ही ख़राब करना नहीं चाहेगा. शहरों में बैठे नेता कुछ भी कहते हों, लेकिन धरातल पर दलित यही सोच रखते हैं.
सत्तारुढ़ बीजेपी केंद्र और राज्य सरकार के कामकाज और योजनाओं का हवाला देकर कहती है कि दलित समुदाय पूरी तरह बीजेपी के साथ है.
पार्टी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने बीबीसी से कहा, ''बीजेपी की दोनों सरकारों ने दलित समुदाय के लिए बहुत कुछ किया है. हमने हर योजना में दलित समुदाय का स्थान निश्चित किया है. फिर चाहे उनकी शिक्षा का मामला हो या रोजगार और स्वाथ्य का. हमने बहुत ईमानदारी और शिद्दत से इन वर्गों के लिए काम किया है. स्टार्ट अप योजना में हर बैंक ही नहीं, हर बैंक की शाखा को बहुत साफ़ निर्देश थे कि वे एक महिला, एक एससी और एक एसटी को हर सूरत में ऋण देंगे. इस लिहाज से स्वरोजगार के लाखों अवसर उपलब्ध करवाए गए. हम बिना किसी प्रचार के अपना काम करते हैं.''
वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा का कहना था कि कांग्रेस शुरू से ही वंचित वर्गों के कल्याण और मज़बूती के लिए काम करती रही है. लिहाजा इन वर्गों के लोग कांग्रेस के साथ ही रहेंगे.
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